चाईबासा: झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति के राज्य पदाधिकारियों ने गुरुवार को कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति को ज्ञापन सौंपकर क्लस्टर सिस्टम के तहत जमशेदपुर, घाटशिला और चाईबासा के महाविद्यालयों से बांग्ला विषय हटाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। समिति ने बांग्ला विषय की पढ़ाई को पहले की तरह जारी रखने की मांग की।
समिति का कहना है कि कोल्हान क्षेत्र में बांग्ला प्रमुख भाषाओं में से एक है और लाखों लोग प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर तक बांग्ला भाषा एवं साहित्य का अध्ययन करते रहे हैं। ऐसे में महाविद्यालयों से बांग्ला विषय हटाने का प्रस्ताव विद्यार्थियों और बांग्लाभाषी समाज की भावनाओं के विपरीत है।ज्ञापन में कहा गया है कि बांग्ला केवल एक भाषा नहीं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, साहित्य, इतिहास और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
लंबे समय से विभिन्न महाविद्यालयों में बांग्ला विषय की पढ़ाई होती रही है और बड़ी संख्या में विद्यार्थी इसे उच्च शिक्षा के लिए चुनते हैं।समिति ने नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें मातृभाषा में शिक्षा के महत्व को स्वीकार किया गया है। साथ ही झारखंड सरकार भी क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों से बांग्ला विषय हटाना नई शिक्षा नीति की भावना के विपरीत होगा।समिति ने मांग की कि जमशेदपुर, घाटशिला और चाईबासा के सभी संबंधित महाविद्यालयों में बांग्ला विषय को पूर्ववत बनाए रखा जाए तथा इसके अध्ययन-अध्यापन की निरंतरता सुनिश्चित की जाए। साथ ही बांग्लाभाषी विद्यार्थियों और समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति के सचिव राजेश राय ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस महत्वपूर्ण विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए विद्यार्थियों, भाषा और संस्कृति के हित में सकारात्मक निर्णय लेगा।
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