*सरायकेला छऊ नृत्यांगना उषा मिश्रा को भारत सरकार की वरिष्ठ फैलोशिप, झारखंड की कला परंपरा को मिली नई पहचान*


चाईबासा: झारखंड की प्रसिद्ध सरायकेला छऊ नृत्यांगना, रंगकर्मी एवं सांस्कृतिक शोधकर्ता शहर चाईबासा के न्यू कॉलोनी टुंगरी निवासी उषा मिश्रा को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा लोक, पारंपरिक एवं स्वदेशी कला के क्षेत्र में प्रतिष्ठित वरिष्ठ फैलोशिप प्रदान की गई है। यह सम्मान सरायकेला छऊ नृत्य परंपरा और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव की बात मानी जा रही है।उषा मिश्रा इस वरिष्ठ फैलोशिप के अंतर्गत “सांस्कृतिक समन्वय और नाट्य दृष्टि : सरायकेला छऊ नृत्य में लोक, पारंपरिक एवं क्षेत्रीय तत्वों के प्रभाव का अध्ययन तथा महिला सशक्तिकरण के विशेष संदर्भ में” विषय पर शोध कार्य करेंगी। यह शोध कार्य प्रसिद्ध छऊ गुरु एवं विद्वान रजतेंदु रथ के मार्गदर्शन में पूरा किया जाएगा।इस शोध का उद्देश्य सरायकेला छऊ नृत्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसके सांस्कृतिक विकास, नाट्य शैली और लोक एवं क्षेत्रीय परंपराओं के प्रभाव का अध्ययन करना है। इसके साथ ही छऊ नृत्य में महिलाओं की भूमिका, उनके योगदान, चुनौतियों और कला के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की प्रक्रिया को भी दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।उषा मिश्रा राष्ट्रीय स्तर की छऊ नृत्यांगना हैं। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से जुड़े आयोजनों और कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। कला के क्षेत्र में उन्होंने कई प्रसिद्ध गुरुओं से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।उनके प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में पद्मश्री पंडित गोपाल प्रसाद दुबे, संगीत नाटक अकादमी सम्मानित रंगमंच गुरु प्रोफेसर उषा गांगुली कोलकाता, पद्मश्री मुकुंद नायक, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष गुरु रतन थियाम, गुरु तरुण कुमार भोल, गुरु मनोरंजन साहू, गुरु सुधांशु शेखर पाणि, गुरु तपन पटनायक, लोक गुरु परमानंदा, वरिष्ठ फैलोशिप प्राप्त गुरु सुनील दुबे, वरिष्ठ फैलोशिप प्राप्त गुरु रजतेंदु रथ, रंगमंच गुरु प्रोफेसर अनिल ठाकुर, वरिष्ठ फैलोशिप प्राप्त शिवलाल सागर, वरिष्ठ नाट्य गुरु मोहम्मद निजाम, गुरु के. कृष्ण मूर्ति, वरिष्ठ फैलोशिप प्राप्त दीपाली दी, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के गुरु प्रोफेसर तरुण प्रधान, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संगीत गुरु प्रोफेसर रत्ना पाणिकर, रंगमंच गुरु प्रोफेसर रवि चतुर्वेदी, रंगमंच गुरु प्रकाश कुमार गुप्ता और नाट्य लेखक राजेश कुमार सहित कई प्रतिष्ठित कलाकारों का योगदान रहा है।उषा मिश्रा ने इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, अपने सभी गुरुओं, गुरु रजतेंदु रथ, परिवारजनों, सहयोगियों और कला प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह फैलोशिप सरायकेला छऊ और कोल्हान क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और शोध कार्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।उन्होंने कहा कि छऊ नृत्य केवल एक कला शैली नहीं बल्कि झारखंड की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर है। इस शोध के माध्यम से छऊ नृत्य की परंपरा, विकास और समाज में इसके योगदान को नई दिशा मिलेगी।उषा मिश्रा को मिली यह वरिष्ठ फैलोशिप झारखंड की लोक एवं पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने वाली उपलब्धि है। इससे सरायकेला छऊ को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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