दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण, राष्ट्रपति भवन में पत्नी रूपी सोरेन ने ग्रहण किया सम्मान


नई दिल्ली/रांची: झारखंड राज्य गठन आंदोलन के महानायक, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन को मंगलवार को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके ऐतिहासिक योगदान को नमन करते हुए यह सम्मान प्रदान किया।दिशोम गुरु की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी एवं विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। सम्मान ग्रहण करने का भावुक क्षण राष्ट्रपति भवन में उपस्थित सभी लोगों के लिए यादगार बन गया। इस दौरान शिबू सोरेन के संघर्ष, त्याग और जनसेवा को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शिबू सोरेन के नाम की घोषणा पद्म भूषण सम्मान के लिए की थी। आदिवासी समाज, गरीबों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने तथा झारखंड राज्य आंदोलन को निर्णायक दिशा देने में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।शिबू सोरेन ने अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने झारखंड अलग राज्य आंदोलन को जनआंदोलन का स्वरूप दिया और आदिवासियों की आवाज को देश की संसद तक पहुंचाया। उनके संघर्ष और नेतृत्व का ही परिणाम था कि वर्ष 2000 में झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।पद्म भूषण सम्मान मिलने के बाद झारखंड सहित देशभर में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के बीच खुशी का माहौल है। इसे झारखंड आंदोलन, आदिवासी समाज और राज्य की अस्मिता को मिला राष्ट्रीय सम्मान माना जा रहा है।

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