चाईबासा: झारखंड में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। छह माह से मानदेय नहीं मिलने के कारण अनुबंधित स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद अब 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के चालक भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर उतर गए हैं। पश्चिमी सिंहभूम जिले में संचालित 108 एंबुलेंस के सभी चालक गुरुवार को सिविल सर्जन कार्यालय के पास बैठकर हड़ताल पर चले गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की।108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने बताया कि वर्तमान में सम्मान फाउंडेशन, जो पटना बिहार की एनजीओ है, उसके माध्यम से झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन माह से जिले सहित राज्य के सभी चालकों को मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। मानदेय नहीं मिलने के कारण चालक आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उनका बकाया मानदेय नहीं दिया जाएगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।शैलेंद्र महतो ने बताया कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में जितनी एंबुलेंस की आवश्यकता है, उतनी उपलब्ध नहीं कराई गई है। वर्तमान में केवल सात से आठ गाड़ियां ही संचालित हो रही हैं, जिनकी स्थिति भी काफी खराब है। उन्होंने कहा कि कई बार वाहन 30 किलोमीटर चलने के बाद परेशानी देने लगते हैं।वहीं संघ के सचिव राजेश गोप ने कहा कि एंबुलेंस की मरम्मत समय पर नहीं कराई जाती है। इसके अलावा वाहन में तेल की समस्या भी बनी रहती है। उन्होंने बताया कि कई बार तेल के लिए तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस नहीं होने के कारण मरीजों और दुर्घटनाग्रस्त लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है, जिसका गुस्सा अक्सर चालक कर्मचारियों को झेलना पड़ता है।उन्होंने कहा कि चालक हमेशा मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने का प्रयास करते हैं, लेकिन 108 एंबुलेंस सेवा का कॉल ऑपरेशन रांची से संचालित होता है। कई बार चालक को जानकारी बाद में मिलती है, इसलिए हर समस्या के लिए चालकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।इस हड़ताल में पश्चिमी सिंहभूम जिले के 30 से अधिक 108 एंबुलेंस चालक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कर्मचारियों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
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