*वारंग क्षिति लिपि के अन्वेषक ओत गुरु कोल लको बोदरा की 40वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि*


चाईबासा: कला संस्कृति भवन, हरीगुटू चाईबासा में वारंग क्षिति लिपि के अन्वेषक ओत गुरु कोल लको बोदरा की 40वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और भाषा-साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।

सभा में उपन्यासकार तिलक बारी ने कहा कि ओत गुरु कोल लको बोदरा ने भाषा और लिपि के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए समाज को अपने लेखन और साहित्य के क्षेत्र में लगातार कार्य करने की आवश्यकता है।

पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष भूषण पिंगुवा ने युवा महासभा द्वारा हो भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति जागरूक होकर वारंग क्षिति लिपि को अपनाने और आगे बढ़ाने की जरूरत है।युवा महासभा के पूर्व अध्यक्ष बीर सिंह बुड़ीउली ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए घोषणा की कि आगामी 19 सितंबर 2016 को ओत गुरु कोल लको बोदरा की 107वीं जयंती के अवसर पर चाईबासा शहर में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने इसके लिए समाज के लोगों से तन, मन और धन से सहयोग करने की अपील की, ताकि आने वाली पीढ़ियां भाषा और लिपि की विरासत को बनाए रख सकें।कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त संगठन के.सी. बुड़ीउली, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र पूर्ति, जय सिंह कुंटिया और बागुन बोदरा सहित अन्य लोगों ने अपने विचार रखे। सभा का संचालन जिला अध्यक्ष गंगाराम बिरुवा उर्फ शेर सिंह बिरुवा ने किया।इस अवसर पर तिलक बारी, भूषण पिंगुवा, के.सी. बुड़ीउली, जय सिंह कुंटिया, हरीश चंद सामड, बागुन बोदरा, कुसुम केराई, शेर सिंह बिरुवा, शंकर सिद्दु, कमलेश बिरुवा, सुरेंद्र पूर्ति सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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