गिरिडीह: गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के मुंडरो गांव का एक परिवार पिछले नौ दिनों से अपने प्रियजन के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहा है। सऊदी अरब में कार्यरत प्रवासी मजदूर द्वारिका महतो की 20 जून 2026 को काम के दौरान मौत हो गई थी, लेकिन नौ दिन बीत जाने के बावजूद उनका शव अब तक भारत नहीं पहुंच सका है। वहीं, कंपनी की ओर से मिलने वाले मुआवजे को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से परिजन गहरे सदमे और चिंता में हैं।
जानकारी के अनुसार, मृतक द्वारिका महतो मूल रूप से डुमरी थाना क्षेत्र के चीनो समदा गांव निवासी दशरथ महतो के पुत्र थे। पिछले करीब 25 वर्षों से वह अपने ससुराल मुंडरो गांव में घरजमाई के रूप में रह रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वर्ष 2005 के जनवरी माह में वह रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए थे, जहां वह केईसी कंपनी में कार्यरत थे।द्वारिका महतो अपने पीछे पत्नी धनेश्वरी देवी, पुत्र सचिन कुमार, सतीश कुमार और नीतीश कुमार सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
पत्नी धनेश्वरी देवी ने बताया कि पति की मौत की खबर मिलने के बाद से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने कहा कि नौ दिन बीत जाने के बाद भी न तो पति का शव भारत पहुंचा है और न ही कंपनी की ओर से मुआवजे को लेकर कोई संतोषजनक जवाब मिला है।प्रवासी श्रमिकों के हितों के लिए कार्य करने वाले सिकंदर अली लगातार इस मामले में संबंधित कंपनी के अधिकारियों के संपर्क में हैं।
उन्होंने कंपनी से मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने और शव को जल्द से जल्द भारत भेजने की मांग की है, ताकि परिवार अपने प्रियजन का अंतिम दर्शन कर सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर सके।इधर, मृतक की पत्नी ने केंद्र और राज्य सरकार से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने सरकार से शव को शीघ्र भारत लाने, उचित मुआवजा दिलाने और शोकाकुल परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
परिवार की निगाहें अब सरकार और संबंधित कंपनी की कार्रवाई पर टिकी हैं। परिजनों का कहना है कि जब तक द्वारिका महतो का शव भारत नहीं पहुंच जाता, तब तक परिवार की पीड़ा कम नहीं हो सकती।
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