जमशेदपुर: निजी विद्यालयों द्वारा बार-बार पाठ्यपुस्तकों में बदलाव और लगातार बढ़ाई जा रही फीस के खिलाफ अब अभिभावकों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। शिक्षा के बढ़ते खर्च से परेशान अभिभावकों ने राज्य सरकार से निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट नीति और प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था लागू करने की मांग की है।मांग की गई है कि CBSE, ICSE और राज्य बोर्ड से संबद्ध सभी विद्यालयों में संबंधित बोर्ड के अनुसार विषयवार समान पाठ्यपुस्तकें लागू की जाएं, ताकि एक ही बोर्ड के अलग-अलग स्कूलों में अलग-अलग किताबें चलाने की व्यवस्था समाप्त हो सके। अभिभावकों का कहना है कि हर वर्ष किताबें बदलने की प्रवृत्ति के कारण उन्हें नई पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। समान पाठ्यपुस्तक व्यवस्था लागू होने से विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक समानता भी सुनिश्चित होगी।इसके साथ ही निजी विद्यालयों में री-एडमिशन शुल्क, बिल्डिंग फंड और अन्य अतिरिक्त मदों के नाम पर वसूली जाने वाली राशि को तत्काल बंद करने की मांग भी उठाई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता बबलू झा ने कहा कि इन अतिरिक्त शुल्कों के कारण शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिसका सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। कई अभिभावक बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक संकट का सामना करने को मजबूर हैं।इन्हीं मांगों को लेकर शुक्रवार को बारीडीह गोलचक्कर पर नुक्कड़ नाटक और भिक्षाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक तरीके से सरकार और समाज का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका कहना था कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, व्यवसाय का नहीं, और बच्चों की पढ़ाई को कमाई का जरिया बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना और पुस्तक चयन प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने, निगरानी तंत्र विकसित करने तथा अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अभिभावकों के हितों की अनदेखी जारी रही तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल फीस और किताबों की नहीं, बल्कि सभी बच्चों को सुलभ, पारदर्शी और न्यायसंगत शिक्षा उपलब्ध कराने की है।
विद्यालयों की मनमानी के खिलाफ सड़कों पर उतरे अभिभावक, पुस्तक परिवर्तन और फीस वृद्धि पर राज्य स्तरीय नीति बनाने की उठी मांग
byAvinash Sharma
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