टेंडर प्रक्रिया, वर्क ऑर्डर, शिलान्यास योजनाओं और बोर्ड की स्वीकृति को लेकर उठे सवाल, दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी

जमशेदपुर: मानगो नगर निगम की अल्पकालीन ई-निविदा (ई-टेंडर) प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियागत, प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मेयर श्रीमती सुधा गुप्ता ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। मेयर कार्यालय के अनुसार, निविदा से संबंधित मूल संचिका और प्राप्त शिकायतों की जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो सरकारी नियमों और वित्तीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

प्राथमिक जांच में पाया गया कि निविदा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों—प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन, स्वीकृति पत्र (LOA) जारी करने, संविदा निष्पादन तथा अभिलेख संधारण—में स्थापित नियमों का पालन नहीं किया गया। संचिका में दर्ज पत्रांक 325/TC, दिनांक 28 अक्टूबर 2025 अभिलेखों में उपलब्ध नहीं मिला, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर की आशंका भी जताई गई है।

जांच में यह भी सामने आया कि विधिवत Letter of Acceptance (LOA) जारी किए बिना ही संवेदक को अग्रधन जमा कर एकरारनामा निष्पादित करने का निर्देश दिया गया। निर्धारित समयसीमा में न तो वैध एकरारनामा किया गया और न ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। उपलब्ध एकरारनामा भी अपूर्ण, अस्पष्ट तथा आवश्यक हस्ताक्षरों और प्रमाणीकरण से रहित पाया गया।इसके अलावा, निविदा निस्तारण समिति के अध्यक्ष द्वारा बैठक के लगभग 15 दिन बाद हस्ताक्षर किए जाने और ITB के प्रावधानों के बावजूद संवेदक के विरुद्ध अग्रधन जब्ती अथवा ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

मेयर सुधा गुप्ता ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी, सरकारी प्रक्रिया से छेड़छाड़ या वित्तीय अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।मेयर कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई है कि अन्य सभी कथित "मैनेज टेंडरों" की भी जांच कराने के लिए नगर एवं आवास विकास विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजा गया है। साथ ही दिसंबर माह में हुए शिलान्यास कार्यों की भी जांच की मांग की गई है। 

आरोप है कि कई योजनाओं का शिलान्यास बिना टेंडर प्रक्रिया, प्राक्कलित राशि निर्धारण और वर्क ऑर्डर जारी किए ही कर दिया गया था तथा कई योजनाओं में आज तक न तो वर्क ऑर्डर जारी हुआ और न ही टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई।प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि नगर निगम चुनाव संपन्न होने और बोर्ड गठन की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से बोर्ड की स्वीकृति के बिना टेंडर जारी किए गए, जिसे बोर्ड की अवहेलना और संदिग्ध कार्रवाई बताया गया है।

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