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भारत की पहली ओपन यूनिवर्सिटी बनी जिसने जलवायु परिवर्तन पर शुरू किया विशेष स्नातकोत्तर कार्यक्रम, किसी भी विषय के स्नातक ले सकेंगे प्रवेश
चाईबासा: जलवायु परिवर्तन की बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने और पर्यावरण के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) ने एक नई पहल की है। विश्वविद्यालय ने मास्टर ऑफ साइंस (M.Sc.) इन क्लाइमेट चेंज कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके साथ ही IGNOU देश की पहली ओपन यूनिवर्सिटी बन गई है, जिसने भविष्य के क्लाइमेट लीडर्स तैयार करने के उद्देश्य से यह विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया है।
IGNOU क्षेत्रीय केंद्र रांची के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक एवं प्रमुख डॉ. शुभकान्त मोहंती ने बताया कि यह कार्यक्रम वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक चुनौतियों में शामिल जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे दक्ष प्रोफेशनल तैयार करना है, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को क्लाइमेट साइंस, क्लाइमेट रिस्क, अनुकूलन एवं शमन रणनीतियां, पर्यावरणीय गवर्नेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे विषयों का अध्ययन कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा प्रणाली, कृषि, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, कचरा प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी, स्वास्थ्य, इकोसिस्टम बहाली, पर्यावरण कानून और क्लाइमेट असेसमेंट टूल्स जैसे महत्वपूर्ण विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।
इस दो वर्षीय कार्यक्रम का संचालन डॉ. वी. वेंकटरामनन और प्रो. शची शाह के नेतृत्व में किया जाएगा। दोनों विशेषज्ञों को पर्यावरण, सस्टेनेबिलिटी और क्लाइमेट चेंज अध्ययन के क्षेत्र में व्यापक शैक्षणिक एवं शोध अनुभव प्राप्त है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, इस कार्यक्रम में प्रवेश के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक होना अनिवार्य है। कार्यक्रम में कुल 80 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। वहीं, पहले वर्ष को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लाइमेट चेंज (PGDCCC) प्राप्त करने का विकल्प भी मिलेगा।
IGNOU ने स्नातक विद्यार्थियों, कार्यरत प्रोफेशनल्स, नीति निर्माताओं, शिक्षकों और पर्यावरण के प्रति रुचि रखने वाले लोगों से इस कार्यक्रम से जुड़ने की अपील की है। विश्वविद्यालय का मानना है कि विज्ञान आधारित और टिकाऊ समाधानों के माध्यम से ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का प्रभावी सामना किया जा सकता है और इसके लिए नई पीढ़ी को तैयार करना समय की आवश्यकता है।
इच्छुक अभ्यर्थी अधिक जानकारी के लिए IGNOU की आधिकारिक वेबसाइट तथा क्षेत्रीय केंद्र रांची से संपर्क कर सकते हैं।
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