बिभिन्न मांगों को लेकर एकजुट हुए पंचायत सचिव, सरकार से सुविधाएं और सम्मान बढ़ाने की मांग

 
गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने वाले पंचायत सचिव अब अपनी मांगों को लेकर मुखर हो गए हैं। पूर्वी सिंहभूम जिले के 11 प्रखंडों से 120 से अधिक पंचायत सचिव एक मंच पर जुटे और सरकार के समक्ष अपनी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से रखा। पंचायत सचिवों का कहना है कि उन पर लगातार कार्यभार बढ़ता जा रहा है, लेकिन सुविधाएं और वेतनमान उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहे हैं।रिपोर्ट:हाल ही में बोड़ाम प्रखंड में कार्यरत पंचायत सचिव स्वर्गीय सुजीत कुमार के असामयिक निधन के बाद पंचायत सचिवों में चिंता और आक्रोश का माहौल है।
 सचिवों का कहना है कि वे लगातार बढ़ते कार्य दबाव के बीच काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं और सुविधाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।पंचायत सचिवों के अनुसार मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने, ग्राम सभा आयोजन, चुनावी कार्यों सहित दर्जनों सरकारी योजनाओं के संचालन और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उन पर होती है।
 इसके बावजूद उन्हें कार्यभार के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।पंचायत सचिवों ने सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें 2400 ग्रेड पे लागू करना, विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से बीपीआरओ पद पर प्रोन्नति का अवसर, कार्यभार के अनुरूप वेतन एवं भत्ते, स्पष्ट सेवा नियमावली, मानसिक एवं प्रशासनिक प्रताड़ना पर रोक, पंचायत मुख्यालय में 2BHK सरकारी आवास तथा क्षेत्र भ्रमण के लिए यात्रा भत्ता शामिल हैं।सचिवों का कहना है कि उनकी मांगें केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सम्मानजनक कार्य वातावरण, सुरक्षा और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था से भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।हालांकि पंचायत सचिवों ने यह भी उम्मीद जताई है कि झारखंड सरकार उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से समझेगी और उचित समाधान निकालने का प्रयास करेगी। उनका कहना है कि पंचायत सचिव ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी समस्याओं का समाधान ग्रामीण विकास व्यवस्था को और मजबूत करेगा।आउट्रो:पंचायत सचिवों की यह लड़ाई केवल वेतन और भत्तों की नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर कार्य व्यवस्था की भी है। अब सभी की नजर सरकार पर टिकी है कि इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, क्योंकि मजबूत पंचायत व्यवस्था ही मजबूत ग्रामीण विकास की आधारशिला मानी जाती है।

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