विश्व पर्यावरण दिवस पर रबिन्द्र गिलुवा का संदेश: "सोना-चांदी नहीं, पेड़ हैं हमारी असली विरासत"

चक्रधरपुर: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आदिवासी युवा मित्र मण्डल, चक्रधरपुर के सचिव रबिन्द्र गिलुवा ने प्रकृति संरक्षण और आदिवासी जीवन-दर्शन को लेकर एक भावनात्मक संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज जिस सोने-चांदी और हीरे-जवाहरात को धन-दौलत मानता है, आदिवासी समाज के लिए असली संपत्ति जल, जंगल और जमीन हैं।उन्होंने कहा कि आदिवासियत का मूल आधार प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीना है। पेड़-पौधे केवल संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अस्तित्व का अभिन्न हिस्सा हैं। आज जब दुनिया विकास की दौड़ में लगातार जंगलों को खत्म कर रही है, तब पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।रबिन्द्र गिलुवा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम “Inspired by Nature. For Climate. For Our Future” आदिवासी समाज की उस सोच को प्रतिबिंबित करती है, जो सदियों से प्रकृति को गुरु और संरक्षक मानती आई है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय संकटों का समाधान प्रकृति के संरक्षण में ही निहित है।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने हमेशा जरूरत भर ही प्रकृति से लिया है और उसके संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी माना है। जंगलों, नदियों और पहाड़ों के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। सोना और हीरा भले ही आर्थिक मूल्य रखते हों, लेकिन वे न तो ऑक्सीजन दे सकते हैं और न ही जीवन के लिए आवश्यक संसाधन।अपने संदेश में उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली बचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारी विरासत है और इसकी रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।अंत में उन्होंने कहा, "पेड़ लगाइए, जीवन बचाइए। क्योंकि प्रकृति है, तो ही हम हैं।"— रबिन्द्र गिलुवासचिव, आदिवासी युवा मित्र मण्डल, चक्रधरपुर

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