सरायकेला। झारखंड की विश्वविख्यात सरायकेला छऊ कला को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। छऊ मुखौटा निर्माण कला के वरिष्ठ गुरु सुशांत कुमार महापात्र को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी सम्मान के लिए चुना गया है। वहीं युवा छऊ कलाकार कुनाल सामल को कला के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।संगीत नाटक अकादमी की आधिकारिक घोषणा के बाद सरायकेला सहित पूरे झारखंड के कला एवं सांस्कृतिक जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस उपलब्धि को सरायकेला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।लंबे समय से सरायकेला छऊ नृत्य और पारंपरिक मुखौटा निर्माण कला अपनी विशिष्ट शैली के कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहचान बना चुकी है। अब राष्ट्रीय सम्मान मिलने से इस कला की प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ गई है।नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने दोनों कलाकारों को सम्मानित कर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरायकेला की छऊ कला इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है। सुशांत कुमार महापात्र और कुनाल सामल ने अपनी प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की साधना से न केवल जिले बल्कि पूरे झारखंड का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल दो कलाकारों का नहीं, बल्कि सरायकेला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है। सरकार और समाज को इस कला के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए।गौरतलब है कि सरायकेला छऊ और यहां की पारंपरिक मुखौटा निर्माण कला भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर मिले इन सम्मानों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरायकेला प्रतिभा, परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि की अनूठी पहचान रखने वाला क्षेत्र है।इस अवसर पर पद्मश्री शशधर आचार्य, गुरु भजन पटनायक, भोला मोहंती, रूपेश साहू, संतोष कर सहित अनेक कला प्रेमी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
झारखंड के लिए गर्व का पल! सरायकेला के दो छऊ कलाकारों को मिला राष्ट्रीय सम्मान
byAvinash Sharma
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