जमशेदपुर : आज की तेज़ रफ्तार और अत्यधिक जुड़े वैश्विक परिवेश में मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य कार्यस्थलों की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है। मई माह में मनाया जाने वाला मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह इस बात की याद दिलाता है कि भावनात्मक कल्याण अब कोई गौण विषय नहीं, बल्कि बेहतर जीवन, कार्य क्षमता और मजबूत संबंधों का आधार बन चुका है।
पिछले कुछ वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज और संगठनों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिस विषय पर पहले खुलकर चर्चा नहीं होती थी, आज वही वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल संस्कृति का अहम हिस्सा बन गया है। कोविड महामारी के बाद व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के बीच की सीमाएं कम होने से कर्मचारियों पर मानसिक और भावनात्मक दबाव बढ़ा है। ऐसे में संगठनों के सामने कर्मचारियों के मानसिक संतुलन और भावनात्मक सुरक्षा को बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारी कल्याण केवल मानव संसाधन विभाग तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह व्यवसाय, नेतृत्व और संगठनात्मक संस्कृति से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। अब मानसिक स्वास्थ्य को केवल बीमारी के नजरिए से नहीं, बल्कि भावनात्मक मजबूती, खुशी, मनोवैज्ञानिक सुरक्षा और सकारात्मक कार्य संस्कृति के रूप में देखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों को खुलकर अपनी समस्याएं साझा करने और सहायता लेने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
इसी दिशा में टाटा स्टील द्वारा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह के दौरान कई पहलें शुरू की गई हैं। कार्यक्रम की शुरुआत ‘साइंस ऑफ हैप्पीनेस’ वेबिनार से हुई, जिसमें माइंडफुल लिविंग और भावनात्मक संतुलन पर चर्चा की गई। इसके अलावा ‘हैप्पीनेस रिचार्ज’ नामक 15 दिवसीय वेलनेस कॉर्नर चैलेंज भी आयोजित किया गया, जिसमें कर्मचारियों को कृतज्ञता, माइंडफुल ब्रेक्स, परिवार के साथ समय बिताने और दयालुता जैसे सकारात्मक दैनिक अभ्यास अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कंपनी द्वारा कर्मचारियों के लिए 24×7 एम्प्लॉयी असिस्टेंस प्रोग्राम और गोपनीय काउंसलिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि उन्हें मानसिक और भावनात्मक सहयोग निरंतर मिलता रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य के कार्यस्थलों को केवल संकट प्रबंधन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जहां कर्मचारी बिना किसी भय या झिझक के अपनी बात रख सकें और जरूरत पड़ने पर मदद लेने में सहज महसूस करें। सहानुभूति, विश्वास, समावेशन और मानवीय संबंधों पर आधारित कार्य संस्कृति ही स्वस्थ और सशक्त संगठनों की पहचान बनेगी।
अंततः वे संगठन, जो प्रदर्शन के साथ-साथ मानवता को भी प्राथमिकता देंगे, वही भविष्य में मजबूत, खुशहाल और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम कार्यस्थलों और समुदायों का निर्माण कर पाएंगे।
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