डुमरिया: पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड से सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि सारना धर्म का पालन करने के कारण उसके परिवार सहित कुल पांच परिवारों का पिछले लगभग 35 वर्षों से सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है। अब घर की मरम्मत कराने को लेकर विवाद बढ़ने के बाद परिवार ने जिला प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़िता के अनुसार, जब उनके परिवार ने अपनी जमीन पर स्थित पुराने घर की मरम्मत के लिए बाहरी मजदूरों को लगाया, तो कुछ स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। मामले की लिखित शिकायत 28 मई को डुमरिया थाना में दी गई थी।पीड़िता का आरोप है कि थाना स्तर पर समझौते के दौरान सामाजिक व्यवस्था के नाम पर वार्षिक चंदा 5,000 रुपये की दर से 25 वर्षों का बकाया चंदा जमा करने की बात कही गई। कथित रूप से पांच परिवारों से कुल 6.25 लाख रुपये की मांग की गई, जिसके कारण समझौता नहीं हो सका।पीड़िता ने आरोप लगाया है कि थाना से लौटने के दौरान कुछ लोगों ने उनका पीछा किया और जान से मारने की धमकी दी।
इसके बाद उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। भय के कारण परिवार के सदस्य अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं।आरोप है कि हाल के दिनों में कई घटनाएं हुईं, जिनमें साप्ताहिक बाजार में गाली-गलौज और धक्का-मुक्की, एक घर में घुसकर महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार एवं मोबाइल छीनने की घटना, तथा एक अन्य परिवार के घर पर पथराव और बिजली तारों की तोड़फोड़ शामिल हैं।पीड़िता का यह भी आरोप है कि इन घटनाओं से संबंधित आवेदन स्थानीय थाना द्वारा लेने से इनकार कर दिया गया। स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिलने के बाद पीड़िता जिला मुख्यालय पहुंची और उपायुक्त से जान-माल की सुरक्षा तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।फिलहाल मामले में दूसरे पक्ष का बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी। पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर सामाजिक बहिष्कार समाप्त कराने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
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